बजट में 7500 रुपये न्यूनतम पेंशन और महंगाई भत्ता की घोषणा करे सरकार

ईपीएफओ के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली ईपीएस 95 पेंशन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की पेंशन योजना के दायरे में आने वाले पेंशनधारकों के एक प्रतिनिधिमंडल (NAC समिति) ने शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने सरकार से न्यूनतम पेंशन को 1000 से बढ़ाकर बजट में 7500 रुपये महीने करने और उसपर मंहगाई भत्ता लागु करने की मांग की है।

अशोक रावत ने बताया वित्तमंत्री से मिला है आश्वाशन।

EPS 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (एनएसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने सीतारमण से मुलाकात की। बैठक के बाद अशोक राउत ने कहा कि वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि हमारी मांगों पर विचार किया जाएगा।

राउत ने आगे कहा कि वित्त मंत्री का यह आश्वासन हमें उम्मीद देता है। सरकार को आगामी बजट 2025 में ईपीएस 95 की न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये और महंगाई भत्ता की घोषणा करनी चाहिए। इससे कम कुछ भी वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन देने में विफल होगा।

01 फरवरी 2025 को आयेंगा, आगामी बजट।

वित्त मंत्री सीतारमण वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आम बजट एक फरवरी, 2025 को संसद में पेश करेंगी। इस बजट में ईपीएफओ के पेंशनभोगी महंगाई भत्ते के साथ मूल पेंशन बजट में 7500 रुपये मासिक करने, पेंशनभोगियों के पति या पत्नी को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं देने, उच्च पेंशन का सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार लाभ समेत अन्य मांग कर रहे हैं।

ईपीएस 95 पेंशन की मांगो पर अशोक रावत की प्रेस वार्ता।

NAC समिति के अध्यक्ष अशोक राउत ने मुलाकात से पहले संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय और राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), निजी संगठनों, और देशभर के कारखानों से जुड़े 78 लाख से अधिक पेंशनधारकों की दुर्दशा का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि पेंशनधारक 7 – 8 साल से महंगाई भत्ता के साथ-साथ न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और पेंशनधारकों तथा उनके जीवनसाथी के लिए मुफ्त मेडिकल चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

अशोक राउत ने दावा किया कि सरकार द्वारा 2014 में 1000 रुपये न्यूनतम पेंशन की घोषणा के बावजूद अभी भी 36.60 लाख से अधिक पेंशनभोगी इससे कम राशि प्राप्त कर रहे हैं।

दरअसल, ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना), 95 के तहत आने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन का 12 प्रतिशत हिस्सा भविष्य निधि में जाता है। वहीं नियोक्ता के 12 प्रतिशत हिस्से में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है। इसके अलावा पेंशन कोष में सरकार भी 1.16 प्रतिशत का योगदान करती है।

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